Thursday, September 25, 2008

आखिरी मुलाकात

कॉलेज की सड़क के किनारे बैठे आते जाते सबको ताकना, कैंटीन की दो रुपए की चाय, अफ अम अस की कैंटीन में रद्दी सी पेप्सी में पैसे बेकार करना, प्लास्टिक की टूटी कुर्सियों पर बैठे....

अपनी जिंदगी के उन अधूरे लम्हों में पूरी जिंदगी को जी लेना ।

दो मिनट में हजारो सपने देख लेना , और दो मिनट में ही तोड़ देना

चाय के कप के साथ जब भी सोचती हु तो डर लगता है

जिंदगी अभी भी अधूरी है उन लम्हों में

हाथ खुलते ही रेत की तरह लम्हे फिसल जाते है

Friday, July 11, 2008

तमन्ना

एक छोटी सी लड़की
सफेद स्कर्ट, शर्ट पहने
पापा का हाथ थामे जा रही है,
काली सी सड़क पर
पापा का हाथ छोड़, अकेले चल पड़ी है क्योंकि बड़ी हो गई है
लेकिन नही जानती की सड़क सच में काली है